सतगुरु सिंगा को सिंगाजी भजन

जितेंद्र महाराज हरदा
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॥ पावन पाठ ॥

गढ़ पिपल्या को धाम बड़ो पावन

गुरु दरबार मख लग मनभावन

सिंगाजी जावां रे, निशाण लइ न, सिंगाजी जावां रे

सिंगा स्वामी की दुनिया दीवानी

अगल बगल माइ रेवा को पानी

दर्शन पावां रे, निशाण लइ न, सिंगाजी जावां रे

शरद पूनम को मेलों रे प्यारो

सिंगाजी जांव रे संसार सारों

झूला झूली आवा रे, निशाण लइ न, सिंगाजी जावां रे

भैया भी आव न, भाभी भी आव

संग म नाना लेखरू न ख लाव

आनंद मनावा रे, निशाण लइ न, सिंगाजी जावां रे

पैदल आव कोई लाव रे गाड़ी

महाराज जितेंद्र लिख निमाड़ी

सिंगाजी गुण गावा रे, निशाण लइ न, सिंगाजी जावां रे

लेखक - जितेंद्र महाराज हरदा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।