मेरी सुन लो अरज प्यारे हो भोले डमरू वाले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरी सुन लो अर्ज़ प्यारे

मेरी, सुन लो, अर्ज़ प्यारे,

ओ भोले, डमरू वाले ॥

मैं, रहने वाली, महलों की रानी ॥

मैं तो, पड़ गई, पर्वत के हवाले,

ओ भोले, डमरू वाले ॥

मेरी, सुन लो, अर्ज़ प्यारे...

मैं, पहनने वाली, रेशम की साड़ी ॥

मैं तो, पड़ गई, मृगछाल हवाले,

ओ भोले, डमरू वाले ॥

मेरी, सुन लो, अर्ज़ प्यारे...

मै, पहनने वाली, मोतियन की माला ॥

मैं तो, पड़ गई, नागों के हवाले,

ओ भोले, डमरू वाले ॥

मेरी, सुन लो, अर्ज़ प्यारे...

मैं, खाने वाली, मेवा मिश्री ॥

मैं तो, पड़ गई, भंगिया के हवाले,

ओ भोले, डमरू वाले ॥

मेरी, सुन लो, अर्ज़ प्यारे...

मैं, रहने वाली, सखियों, के संग में ॥

मैं तो, पड़ गई, भूतों के हवाले,

ओ भोले, डमरू वाले ॥

मेरी, सुन लो, अर्ज़ प्यारे...

मैं, करने वाली, शेर की सवारी ॥

मैं तो, पड़ गई, नंदी के हवाले,

ओ भोले, डमरू वाले ॥

मेरी, सुन लो, अर्ज़ प्यारे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।