आओ कुंजबिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हे, पापों से भर गई धरा यह — आओ कुंज बिहारी,

पापों से भर गई धरा यह — आओ कुंज बिहारी।।

हाँ आओ कुंज बिहारी, हाँ आओ कुंज बिहारी।।(दोहराएँ)

हे श्याम रे, दर्शन दो घनश्याम,

हे गिरधारी, हे मुरारी — अब तो तजो हरिधाम, श्याम रे।।

(कोरस – “हाँ आओ कुंज बिहारी…)

ऐसा शुभ क्षण, ऐसी घड़ी है — जग में हर्ष समाया,

कृष्ण कन्हैया जन्म लिए हैं — सुख का सागर लाया।।

सुख का सागर लाया, धन्य हुआ यह मथुरा धाम,

हे गिरधारी, हे मुरारी — अब तो पधारो ब्रजधाम, श्याम रे।।

(कोरस – “हाँ आओ कुंज बिहारी…)

कष्टों की अब ठौर न कोई, हर मन में खुशियाँ छाईं,

पालनहारे, जगत तुम्हारा — सब पीड़ा हर पाई।।

सब पीड़ा हर पाई, हर्षित सारे तीर्थ-धाम,

हे गिरधारी, हे मुरारी — तुमसे ही सारा जहान, श्याम रे।।

(कोरस – “हाँ आओ कुंज बिहारी…)

कैसे तुझे रिझाऊँ कान्हा, तू नन्द के घर आया,

भूल गए सब दुख और पीड़ा — दर्शन सुख पाया।।

दर्शन सुख पाया, भर दे प्रेम का मधुर घमंड,

हे गिरधारी, हे मुरारी — कर दे जीवन आनंद, श्याम रे।।

(कोरस – “हाँ आओ कुंज बिहारी…)

✍️ रचनाकार: उमेश यादव, शांतिकुंज, हरिद्वार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।