भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

प्रीत का मेवा सजा के

प्रीत का मेवा सजा के ज़िमाऊँ कन्हाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

हर्ष अपार तुझको जिमाऊँ खुशी से

दूध दही माखन और मिश्री से

हर्ष अपार तुझको जिमाऊँ खुशी से

दूध दही माखन और मिश्री से

मीठी मीठी छाछ बनाके

मीठी मीठी छाछ बनाके पिलाऊं कन्हाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

गोदी के पीढ़े पे ममता बिछाके

आंचल के पंखे को हिलाके डुलाके

गोदी के पीढ़े पे ममता बिछाके

आंचल के पंखे को हिलाके डुलाके

लोरी सुना सुना मैं

लोरी सुना सुना मैं करूं सेवकाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

करमा की मनुहार सुदामा के चावल की

मीरा की भक्ति की नरसी के प्रीत की

करमा की मनुहार सुदामा के चावल की

मीरा की भक्ति की नरसी के प्रीत की

अपना ले मुझको तोहे

अपना ले मुझको तोहे सौगंध कन्हाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

रूठ न जाना कान्हा तू मुझ गरीब से

तेरा साथ मिला मुझको बड़े ही नसीब से

रूठ न जाना कान्हा तू मुझ गरीब से

तेरा साथ मिला मुझको बड़े ही नसीब से

प्रेम सगाई अपनी

प्रेम सगाई अपनी टूटे ना कन्हाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

प्रीत का मेवा सजाके

प्रीत का मेवा सजाके जिमाऊँ कन्हाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

भावों की चाशनी में बनाके मिठाई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।