चुन्नी लेके आया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तू भक्तां दे भरदी भंडार नि मायें

तू भक्तां दे भरदी भंडार नि मायें,

मैं तइयो चुनरी लेके आया दरबार नि मायें ॥२॥

मैं सुनिया तू भाग जगावे ॥२॥

दीन दुखी नू गले लगाए ॥

अज्ज मेरी वी तू सुने पुकार नि मायें,

मैं तइयो चुनरी लेके आया दरबार नि मायें ॥२॥

मैं ज्योत जगा तेरी पूजा करदा ॥२॥

हर दम तेरा नाम सिमरदा ॥

सानूं मावां वाला देजा अज्ज प्यार नि मायें,

मैं तइयो चुनरी लेके आया दरबार नि मायें ॥२॥

कुहाड़े अश्रु दर ते आए ॥२॥

मां तेरीयां भेंटां ले आए ॥

हुण कर ले तू भेंटां स्वीकार नि मायें ॥२॥

मैं तइयो चुनरी लेके आया दरबार नि मायें ॥२॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।