पहन लीयो लंहगा चुनरीया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पहन लीयो लंहगा चुनरीया

पहन, लीयो, लंहगा चुनरीया,

भोले बाबा, बन गए, गुज़रिया ॥

माथे पे, बिंदिया और, कानों में बाली ।

नाक में, नथनिया और, होंठो पे लाली ॥

अरे, करधनिया, सोहे कमरिया,

भोले बाबा, बन गए, गुज़रिया ।

पहन, लीयो, लंहगा चुनरीया...

शंकर जी, भोले से, बन गए भोली ।

भोला को, देख देख, पार्वती बोली ॥

अरी, घुँघटा की, रखियो खबरीया,

भोले बाबा, बन गए, गुज़रिया ।

पहन, लीयो, लंहगा चुनरीया...

चले रास, देखन को, बन के जनानी ।

जहाँ रास, मोहन संग, करे राधा रानी ॥

भोले, आए, झुका के, नज़रिया,

भोले बाबा, बन गए, गुज़रिया ।

पहन, लीयो, लंहगा चुनरीया...

देख देख, भोले को, सोचे कन्हाई ।

आज नई, सखी कौन, घुँघटा में आई ॥

अरे, पकड़ी, मोहन ने कलईया,

भोले बाबा, बन गए, गुज़रिया ।

पहन, लीयो, लंहगा चुनरीया...

खुल गई, पोल जब, घुँघटा उठायो ।

गोपेश्वर, नाम जब, भोले ने पायो ॥

भोले, जा रहे, झुका के नज़रिया,

भोले बाबा, बन गए गुज़रिया ।

पहन, लीयो, लंहगा चुनरीया...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।