डंडे वाले गुरुवरजी

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॥ पावन पाठ ॥

विश्व पूजित है दादा मेरे राजेंद्र सूरी है नाम

कलयुग के अवतारी गुरुवर दुनिया करे प्रणाम

प्रातः स्मरणीय विश्व वंदनीय हर दिल में तेरा नाम

जिस धरती पर पैर पड़े वो धरती हुई महान

ऐसे मेरे गुरुवर जी, डंडे वाले गुरुवर जी प्यारे प्यारे गुरुवर जी ऐसे मेरे गुरुवर

पोस सुदी सातम के दिन को जन्म एक सितारा

रत्न राजगुरु नाम दिया था मांकेसर का दुलारा

अल्प आयु में संयम पाकर छोड़ दिया संसार

क्या तेरा क्या है ये मेरा जग मुसाफिरखाना

ऐसे मेरे गुरुवर जी

यतीयों को सही मार्ग दिखाकर उनके पथ को सुधार

क्रिर्योंद्वार कर जावरा में गुर्जर देश सवरा

आहोर नगर में आचार्य पदवी संघ में हर्ष उल्लास

प्रभु से बढ़कर कोई नहीं है यह तूने पहचाना

ऐसे मेरे गुरुवर जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।