चिंतापुर्णी जिसके साथ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मां चिंतापुर्णी जिसके साथ उसे किस बात की चिंता,

हो जिसके सर पे मां का हाथ उसे किस बात की चिंता,

मां चिंतापुर्णी जिसके साथ........।

जो होगा अच्छा ही होगा क्यों व्यर्थ में चिंता करता है

चिंता है चिता बंदे क्यों मौत से पहले मरता है,

जिसके मां सवारे काज उसे किस बात की चिंता,

मां चिंतापुर्णी जिसके साथ........।

हो चिंता दूर जिस दर पे वो दर है चिंतपूर्णी का,

जहां खुशियां ही खुशियां हैं वो दर है मंगल करणी का,

जिसका थाम ले दाती हाथ उसे किस बात की चिंता,

मां चिंतापुर्णी जिसके साथ........।

तू चिंता क्यों करें उत्तम जब चिंता मां करे तेरी,

सौंप दे हाथ में उसके तू अपने जीवन की डोरी,

जो रखता दाती पे विश्वास उसे किस बात की चिंता,

मां चिंतापुर्णी जिसके साथ........।

गायक व लेखक - राजू उत्तम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।