आरती जग जननी जग तारणि

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जग जननी जग तारणि ओ मेरी मां

आरती उतारू तोरी मां।।(२)

काहेन को तेरो बैठका, काहे न पखारू तेरो पाओ २

जग जननी जग तारणि....…

अगर चंदन को तेरो बैठका, दूधन पखारू तेरो पाओ २

जग जननी जग तारणि....…

कहा उतारू तेरी आरती कहा उतारू तेरो भार २

जग जननी जग तारणि....…

मडिया उतारू तेरी आरती भुवन उतारू तेरो भार २

जग जननी जग तारणि....…

कौन वरन तेरी आरती कौन वरन तेरो भार २

जग जननी जग तारणि....…

कर्पूर वरन तेरी आरती लॉन्ग वरन तेरो भार २

जग जननी जग तारणि....…

सभी जन उतारे तेरी आरती सभी जन उतारे तेरो भार २

जग जननी जग तारणि....…

जग जननी जग तारणि ओ मेरी मां

आरती उतारू तोरी मां।।(२)

सिंगर - जया रतन सिंह पटेल छिंदवाड़ा म प्र)

गीत संगीत - कमलेश बबलू बरमैया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।