मेरे अंगना में आए भोलेनाथ,

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रे अंगना में आए भोलेनाथ,

सखी री मैं क्या मांगू,

क्या मांगू मैं क्या मांगू,

क्या मांगू मैं क्या मांगू,

मेरे अँगना में आए भोले नाथ,

सखी री मैं क्या मांगू।

जब मैंने भोले जी के शीश को देखा,

शीश को देखा सखी शीश को देखा,

मैंने कर लिया गंगा स्नान,

सखी री मैं क्या मांगू,

मेरे अँगना में आए भोले नाथ,

सखी री मैं क्या मांगू

जब मैंने भोले जी के हाथों को देखा,

हाथों को देखा सखी हाथों को देखा,

मुझे मिल गया आशीर्वाद,

सखी री मैं क्या मांगू,

मेरे अँगना में आए भोले नाथ,

सखी री मैं क्या मांगू।

जब मैंने भोले जी के पैरों को देखा,

पैरों को देखा सखी पैरों को देखा,

मेरे हो गए चारों धाम,

सखी री मैं क्या मांगू,

मेरे अँगना में आए भोले नाथ,

सखी री मैं क्या मांगू

जब मैंने भोले जी के मुखड़े को देखा,

मुखड़े को देखा सखी मुखड़े को देखा,

मैं तो हो गई भव से पार,

सखी री मैं क्या मांगू,

मेरे अँगना में आए भोले नाथ,

सखी री मैं क्या मांगू।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।