मन्दिर मन्दिर मे विराजे भोलानाथ

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,

चढ़ा लो लोटा जल भर के....

काहे के गणपति बनाएं,

काहे की बनाए भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,

मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,

चढ़ा लो लोटा जल भर के....

गोबर की गणपति बनाएं,

चिकनी मिट्टी के बनाए भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,

मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,

चढ़ा लो लोटा जल भर के....

कोंन दिना गणपति मनाए,

कोन दिनां भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,

मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,

चढ़ा लो लोटा जल भर के....

बुधवार गणपति मनाए,

सोमवार भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,

मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,

चढ़ा लो लोटा जल भर के....

दूध घास गणपति पे चढ़ावे,

बेलपत्र भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,

मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,

चढ़ा लो लोटा जल भर के....

लड्डू का भोग गणपति को लगाएं,

भांग धतूरा भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,

मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,

चढ़ा लो लोटा जल भर के....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।