जय जय पितर जी महराज

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॥ पावन पाठ ॥

जय जय पितर जी महाराज,

मैं तो शरण पड़यों हूँ थारी,

शरण पड़यो हूँ थारी देवा,

रखियो लाज हमारी,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं तो शरण पड़यों हूँ थारी ।।

आप ही रक्षक आप ही दाता,

आप ही खेवनहारे,

मैं मूरख हूँ कछु नहिं जाणूं,

आप ही हो रखवारे,

जय जय पितर जी महाराज, मैं तो शरण पड़यों हूँ थारी….

आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,

करने मेरी रखवारी,

हम सब जन हैं शरण आपकी,

है ये थारी फुलवारी,

जय जय पितर जी महाराज, मैं तो शरण पड़यों हूँ थारी….

देश और परदेश सब जगह,

आप ही करो सहाई,

काम पड़े पर नाम आपको,

लगे बहुत सुखदाई,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं तो शरण पड़यों हूँ थारी….

मैंभी आयो शरण आपकी,

अपने सहित परिवार,

रक्षा करो आप ही सबकी,

रटू मैं बारम्बार,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं तो शरण पड़यों हूँ थारी….

शरण पड़यो हूँ थारी देवा,

रखियो लाज हमारी,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़यों हूँ थारी ।।

Hemkant jha pyasa

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।