मंगल दाता बुद्धि विधाता लंबोदर सरकार

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

मंगल दाता बुद्धि विधाता लंबोदर सरकार,

आ जाओ मोरे गनराजा मूसा पे होके सवार।

ओ मोरे देवा हो,.....हो गणपति बप्पा हो

आना हो अंगना हमार..........

सब देवता में देवा पहले पूजे जाते,

भक्तों की टेर सुनते, देर ना लगाते।

मूसा सवार होके दर्शन दो इक बार ...2

हो मोरे देवा हो, गणपति बप्पा हो आना हो अंगना हमार

विद्या बुद्धि के तुम हो दाता,

चरणों से जोड़ा स्वामी मैंने है नाता।

हाथ दया कर रख देना, मेरे सिर पर तुम एक बार...2

हो मोरे देवा हो गणपति बप्पा हो आना हो अंगना हमार।

तेरे दर के देवा हम हैं भिखारी, हम सब आए हैं शरण तिहारी।

दृष्टि दया की कर देना हम भक्तों पर एक बार

राहुल पाल भजन तेरे गाये,कर दो बेड़ा पार।

हो मोरे देवा हो, गणपति बप्पा हो...आना हो अंगना हमार

मंगल दादा बुद्धि विधाता लंबोदर सरकार,

आ जाओ मोरे गनराजा, मूसा पे होके सवार।

हो मोरे देवा हो गणपति बप्पा हो आना हो अंगना हमार।

गीतकार एवं गायक राहुल पाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।