हे कुलदेवी हे जगजननी इतनी किरपा कर देना, जिस घर में मेरी बेटी जाए, वो घर खुशियों से भर देना

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : फूल तुम्हे भेजा है खत में

हे कुलदेवी हे जगजननी, इतनी किरपा कर देना

जिस घरमें मेरी बेटी जाए, वो घर खुशियों से भर देना

जितना मैं इसको लाड लडाऊं, कौन करेगा लाड वहां

गलती अगर हो जाएगी इससे, कौन करेगा माफ वहां

उस घर के सारे लोगों को, इस घर जैसा कर देना.. हे

जीवनसाथी के संग मिलकर, अपना घर आबाद करे

प्यार मिले ससुराल में इतना, बाबुल को ना याद करे

रीत रस्म उस घर की सारी, निभा सके ये वर देना.. हे

स्वर्ग समान वो घर होता है, जिस घर में जनमें बेटी

बिन बोले ही घरके सुखदुख, पलमें समझती है बेटी

अम्बरीष मांगे बेटियों के घर, रोज दिवाली कर देना.. हे

लीरिक्स & सिंगर : अम्बरीष कुमार

9327754497

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।