महाकाल का दीवाना हूँ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कोई आशिक कहते है कोई मुझे परवाना कहते है

महाकाल की मस्ती में डूबा हुआ मस्ताना कहते है

कोई पागल कोई प्रेमी मुझे नादान कहते है

में तो महाकाल का बेटा हु मुझे महाकाल का दीवाना कहते है

दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना

दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना........

महाकाल का दीवाना हूं , महाकाल का दीवाना हूं

कोई रोके नहीं कोई टोके ,नहीं में तो आशिक पुराना हूं

महाकाल का दीवाना हूं........

1.) जो भी करता है भक्ति महाकाल की

कभी चिंता न रहती है धन माल की

कभी मौत से हो जाए गर सामना

मौत टलती है चलती नहीं काल की

शिव का वंदन करूं शिव का दर्शन करु शिव से प्रीत लगाना है

महाकाल का दीवाना हूँ.........

2.) सारी दुनिया ने ठुकराया हर हाल में

मुझको अपना बनाया महाकाल ने

गर गिराना जो चाहा था संसार ने

गोदी में बिठाया महाकाल ने

अपना तन मन करूं शिव को अर्पण करूं में बालक तुम्हारा हूँ

महाकाल का दीवाना हूं........

3.) दीवाना दीवाना दीवाना तेरा दीवाना

में तो हूं बाबा महाकाल तेरा दीवाना

तेरे दर्शन को आया बाबा तेरा दीवाना

तेरे ही नाम का आशिक है तेरा दीवाना

दीवाना दीवाना दीवाना तेरा दीवाना

तेरा सुमिरन करूं तेरा वंदन करूं

में तो तेरा दीवाना हूं

महाकाल का दीवाना हूं........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।