रुणिचा दरबार

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जो कोई सच्चे मन से ध्यावे , उसका बेड़ा पार है

रामासा रो प्यार है , रुणिचा दरबार है

रामासा रो प्यार है , बरोठा दरबार है

रामासा रो प्यार है , रुणिचा दरबार है

इसके दर की महिमा भारी , झुकता ये संसार है

जो भी इसकी शरण में आया , रखता उसकी लाज है

रामासा रो प्यार है, रुणिचा दरबार है

रामासा रो प्यार है , बरोठा दरबार है

रामासा रो प्यार है , रुणिचा दरबार है

अजमल जी घर जन्म लियो , कुंकू रा पगलिया मांड्या है

मेणा दे आंगण में खेलियों , उभरतो दूध थमायो है

रामासा रो प्यार है, रुणिचा दरबार है

रामासा रो प्यार है , बरोठा दरबार है

रामासा रो प्यार है , रुणिचा दरबार है

चमत्कार दर्जी को दिखायो , कपड़ा रो घोड़ों उड़ायों है

बंजारा ने पर्चो दिणो , मिसरी को लूण बनायो है

रामासा रो प्यार है, रुणिचा दरबार है

रामासा रो प्यार है , बरोठा दरबार है

रामासा रो प्यार है , रुणिचा दरबार है

मका सु प्याला मंगवाया , पीरा ने भोज करायो है

लक्ष्य की कर दी है चांदी , कलयुग रो अवतार है

रामासा रो प्यार है, रुणिचा दरबार है

रामासा रो प्यार है , बरोठा दरबार है

जो कोई सच्चे मन से ध्यावे , उसका बेड़ा पार है

रामासा रो प्यार है , रुणिचा दरबार है

रामासा रो प्यार है , बरोठा दरबार है

रामासा रो प्यार है , रुणिचा दरबार है

गायक एवं लेखक

लक्ष्य गुप्ता देवास (म. प्र.)

7587677670

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।