जय मां वैष्णो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो,

मैं तो दौड़ी दौड़ी मंदिरया , आई ऐ मां

मैं तो दौड़ी दौड़ी मंदिरया , आई ऐ मां,

बड़ा ऊंचा है तेरा दरबार,

बड़ा सुंदर है तेरा दरबार,

जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो,

मैं तो दौड़ी दौड़ी चुनरिया, लाई ऐ मां,

मैं तो ओढ़ाऊ चुनरिया गोटेदार,

बड़ा ऊंचा है तेरा दरबार,

बड़ा सुंदर है तेरा दरबार,

जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो,

मैं तो दौडी दौडी टीका, नथनी लाई ऐ मां

मैं तो पहनाऊं टीका, नथनी नगीनेदार,

बड़ा ऊंचा है तेरा दरबार,

बड़ा सुंदर है तेरा दरबार,

जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो,

मैं तो दौड़ी दौड़ी झुमकीयां, हरवा लाई ऐ मां,

मैं तो पहनाऊं झुमकीयां, हरवा नवलक्खा,

बड़ा ऊंचा है तेरा दरबार,

बड़ा सुंदर है तेरा दरबार,

जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो,

मैं तो दौड़ी दौड़ी चुड़ला लाई ऐ मां,

मैं तो पहनाऊं चुड़ला, लाल रंग,

बड़ा ऊंचा है तेरा दरबार,

बड़ा सुंदर है तेरा दरबार,

जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो,

मैं तो दौड़ी दौड़ी पायल, बिछिया लाई ऐ मां,

मैं तो पहनाऊं पायल, बिछिया रजतदार,

बड़ा ऊंचा है तेरा दरबार,

बड़ा सुंदर है तेरा दरबार,

जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो,

मैं तो दौड़ी दौड़ी मेहंदी घोल लाई ऐ मां,

मैं तो कोरूंगी, दोनों तेरे हाथ,

बड़ा सुंदर चढ़ेगा लाल रंग,

बड़ा ऊंचा है तेरा दरबार,

बड़ा सुंदर है तेरा दरबार,

जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो,

मैं तो दौड़ी दौड़ी मंदिरया , आई ऐ मां

मैं तो दौड़ी दौड़ी मंदिरया , आई ऐ मां,

जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो , जय मां वैष्णो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।