सुन मेरी मां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन रानी सती दादी भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय दादी जी की

तर्ज श्याम बाबा श्याम बाबा तेरे पास आया हूं

सुन मेरी मांँ,सुन दादी मांँनीमचधाम आई हूं

झोली म थारो श्रृंगार लाई हूं_२

सुन मेरी मांँ सुन दादी मांनीमच धाम आई हूं

झोली म थारो श्रृंगार लाई हूं _२

अमर सुहागन दादी थारो

आज सोलह श्रंगार सजाऊं

माथे ऊपर लाल बिंदिया

कुमकुम भरकर मांग सजाऊं

काजल मेरी मांँ_२ नजर उतारन लाई हूं

झोली में थारो श्रंगार लाई हूं

मोती जड़ क जूड़ो बनाऊं

और बोरलो तने पेहराऊं

लाल गुलाब की कली स‌ दादी

जूड़ा न म और सजाऊं

नथ मेरी मांँ_२ हीरा जड़ी गढ़ाई हूं

झोली में थारो श्रंगार लाई हूं_२

काना म मानिक को कुंडल

रतन जड़ित म चीक पहनाऊं

चूड़लो हाथ म रंग-बिरंगो

सतरंगों घाघरो पहनाऊं

चुनर मेरी मांँ_२ हाथां स सजाई हूं

झोली म थारो श्रंगार लाई हूं _२

कमर तागड़ी जे तू पेहरे

सोनूदेख तुझे हर्षाए

पायल तेरी रुनझुन बाजे

कोमल तुझपे वारी जाए

पोली मेरी मांँ_२ घुंघरा वाली लाई हूं

झोली म थारो श्रंगार लाई हूं _२

सुन मेरी मांँ सुन दादी मांँ नीमच धाम आई हूं

झोली म थारो श्रंगार लाई हूं_२!!

(रचना स्मिता शर्मा सोनू आसनसोल)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।