साईं तेरे कदमों में, जो सुकुन है,

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॥ पावन पाठ ॥

साईं तेरे कदमों में, जो सुकुन है,

वो ना मिल सका कहीं,,

तेरे बिना मेरी, हर दुआ है अधुरी,

तेरा नूर ही रोशनी है.......

स्थाई:- तू ही तो रूह का सुकून है, तू ही तो दिल का जुनून है,

हर सांस में मेरे साईं(बाबा), तेरा जिक्र है

साईं तू मेरे रूबरू है---4

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।