चाहे जितना ले ले कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चाहे जितना ले ले कान्हा काहे को तरस ता है,

ये प्यार भगतो की कुटिया में बरस ता है,

कुटिया का हर तिनका मिलने को तरस ता है,

कुतिया के छपर से बस प्रेम टपकता है,

कुटिया में रहने वाला तेरा नाम जपता है,

ये प्यार भगतो की कुटिया.....

घर पर जो आऊ गे वापिस नही जाओ गये,

ये प्यार गरीबो का तुम भूल ना पाओ गये,

एक वार आने जाने में तेरा क्या बिगड़ता है,

ये प्यार भगतो की कुटिया....

भीलनी की कुटिया से वो प्यार लाये है,

लो झूठे बेरो का उपहार लाये है,

ये किसा सुने वाला तुझे अपना समजता है,

ये प्यार भगतो की कुटिया....................

घर वापिस जाओ गे दिल छोड़ के जाओ गे,

तुम आधे रस्ते से फिर वापिस आओ गये,

बनवारी दिल तेरा मेरा एक जैसे लगता है,

ये प्यार भगतो की कुटिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।