रुणिचा जावा री मारे मन में जची

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

रुणिचा जावा री मारे मन में जची

मारो रामाँपीर हेला पाड़े रे म्हारो बाबा हैलो पाड़े

बाबा थारी कृपा रेवा दे मने भी सेवा करवा दे

रुणिचा रा हो राजवी पैदल पैदल बुलबा दे

लीलो घोड़ो नवलखीयो रे बाबा भल हल भालो सोवे

धोरा धरती जन्म लियो थे धोली ध्वजा फहरावे

बाबा पैदल-पैदल थारे आऊ थारां ही में दर्शन पाऊं

जात जडूला थारे चढ़ाऊ जोड़ा सु में धोक लगाऊ

गांव गांव भंडारा लागे भगत सगला नाचे

ढोल नगाड़ा बाजे नौबता जोता जगमग जागे

नित उट बाबा करू सेवना थारा ही गुण गांउ में

थारे चरण में करन प्रजापत अपनों शीश नवावे

Singer karan prajapat officia।

7976613498

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।