एक बार हमसे साँवरे नज़रें मिलाईए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

एक बार हमसे साँवरे नज़रें मिलाईए ।

नज़रें मिला के श्याम ज़रा मुस्कुराईए...

एक बार हमसे साँवरे नज़रें...

नज़रें हमारी आपकी चौख़ठ पे है अड़ीं,

कब से निहारे राह बेचारी खड़ी-खड़ी ।

नज़रों पे कर रहम इन्हें, अब ना सताईए...

एक बार हमसे साँवरे...

दिल को तो हमने आपके चरणों में रख दिया,

दुनियाँ हमारी आप हैं इतना समझ लिया ।

अब आप अपने हाथ से इसको सजाईए...

एक बार हमसे साँवरे...

यह जानकर कि आप यहीं आस पास हैं,

फिर भी समझ ना आए ये दिल क्यों उदास है ।

ज़ज़्बात दिल के जान ज़रा पास आईए...

एक बार हमसे साँवरे...

प्रहलाद सा बनूं प्रभु हनुमत सी भक्ति दो,

गाऊँ भजन मैं झूम के मीरा सी मस्ती दो ।

भक्त को गले से अपने गले तो लगाईए...

एक बार हमसे साँवरे...

बोल बांके बिहारी लाल की... जय....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।