शिव जी बनकर नर से नार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज़- हो ले के पहला पहला प्यार

शिव जी बन कर नर से नार,

हो कर सज धज कर त्यार,

चल दिए गौरां के संग में, लम्बा सा घूँघट डार...

देखने को रास लीला, मदन मुरार की,

बना कर छवि वोह चले, देखो नर से नर की ।

अपना छोड़ के सब श्रृंगार, पहने जेवर बड़े अपार,

चलते ऐसे जैसे हो कोई नई नवेली नार ।

शिव जी बनकर नर से नार...

महाँ रास में सब सखियाँ, देख बतलाई हैं,

कहाँ की सख़ी है यह जो, घूँघट में आई है ।

मुस्काए तब कृष्ण मुरार, समझ गए हैं यह त्रिपुरार,

ऐसी बंसी बजाई, कान्हा ने उन्हें निहार ।

शिव जी बनकर नर से नार...

बँसी की धुन पे मगन हुए जटाधारी हैं,

झूमकर वो नाचे उत्तरी सर से वो सारी है ।

देख के शरमाई बृज नार, ऐसा हुआ है पहली बार,

मोहन भी मोहित है करके उन पे जाते बलिहार ।

शिव जी बनकर नर से नार...

हर हर महाँदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।