॥ पावन पाठ ॥
अलबेला है, मस्ताना है,
मन राधारमण का दीवाना है।
तेरी करुणा का ऐसा जादू चला,
ये दिल तो हुआ बेगाना है।
देख छवि मेरे राधारमण जू की,
हमने बस यही ठाना है।
ऐसे कंटीले नयन तिहारे
इनमें डूब ही जाना है।
अलबेला है, मस्ताना है,
मन राधारमण का दीवाना है।
अलबेलों की इस बस्ती में,
मिला ऐसा एक खज़ाना है।
कितने भी तूफ़ान हैं आये,
तुमने मुझको थामा है।
दुखों को मेरे हर के प्रभु ने,
खुशी का दिया ख़ज़ाना है।
अलबेला है, मस्ताना है,
मन राधारमण का दीवाना है।
तेरी करुणा का ऐसा जादू चला,
ये दिल तो हुआ बेगाना है।
अलबेला है, मस्ताना है,
मन राधारमण का दीवाना है।
मन राधारमण का दीवाना है…
मन राधारमण का दीवाना है…