भाई बहन के प्रेम का रिश्ता सब रिश्तों से न्यारा है

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : ताजा ताजा कली खिली है

रक्षाबंधन स्पेशल

भाई बहन के प्रेम का रिश्ता

सब रिश्तों से न्यारा है

एक दूजे की ताकत है ये

एक दूजे का सहारा है

हो.... हो....

इस बंधन में बड़ी शक्ति है

सारी दुनिया इसे अपनाई

विश्वास है ये हर बहना को

(के) उसके साथ खड़ा भाई

रक्षा बंधन का त्योंहार.. हो

हर त्योंहार से प्यारा है..

एक दूजे की ताकत है ये

एक दूजे का सहारा है

हो.... हो....

कोई वचन नही अनुबंध नही

फिर भी ये निभता जाता है

ये भाई बहन का अपनापन

हर उम्र में बढ़ता जाता है

अम्बरीष कहे ये डोर नही.. हो

ये तो संस्कार हमारा है..

एक दूजे की ताकत है ये

एक दूजे का सहारा है

हो.... हो....

लीरिक्स : अम्बरीष कुमार

मुंबई 9327754497

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।