आर लगदा न पार लगदा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आर लगदा न पर लगदा,

दिल शेरावाली मां दे दरबार लगदा

प्यारा लगदा न्यारा लगदा,

ओ दाती स्वर्गा तो सोना तेरा द्वार लगदा-2

आर लगदा न पार लगदा..................

तेरे भवन दे अजब नजारे,

पर्वत फुल्लां नाल सिंगारे,

मन नु लगादे प्यारे प्यारे-2

प्यारा लगदा न्यारा लगदा,

ओ दाती स्वर्ग तो सोना तेरा द्वार लगदा

आर लगदा न पार लगदा..............

मनदा नहीं है दिल दीवाना,

जोत तेरी दा है परवाना

चरणा दे विच ही मंगदा ठिकाना_2

होर कोई न ऐदा होर कोई ना,

तेरे बिना माए सूना संसार लगदा

आर लगदा न पर लगदा........................

शाम सवेरे उठदा बहदा

ए मन मेरा मेनू केंदा,

दर्शन दे बिन चैन ना पैदा--2

प्यार कर ले दुलार कर ले,

ओ मैया सबना तो प्यारा तेरा प्यार लगदा

आर लगदा ना पार.........................

हे मां अंबे आद भवानी

दुख हरनी मैया कल्याणी,

चंचल मन दी सुन ले कहानी-2

पुकार सुन ले एक बार सुन ले, तेरे जेहा कोई ना मेनू

गम खार लगदा

आर लगदा न पार लगदा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।