सांसों में मेरी तो तुम ही बसे हो राम

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सांसों में मेरी तो , तुम ही बसे हो राम ,

ये जीवन मेरा तो , मैंने किया तेरे नाम,

मेरे राम, मेरे राम,

पहले पहल था , मैं अनजान तुमसे ,

फिर हुई थोड़ी , पहचान तुमसे ,

अब तो इन होठों पे , रहता तेरा ही नाम,

सांसों में मेरी तो , तुम ही बसे हो राम ,

ये जीवन मेरा तो, मैंने किया तेरे नाम,

मेरे राम, मेरे राम,

ये तो पता हैं , तुम सुनते हो सबकी ,

क्या मैं कहूं बातें , अपने मन की,

मेरे इस मन में बसा, तेरा ही नाम ,

सांसों में मेरी तो , तुम ही बसे हो राम ,

ये जीवन मेरा तो , मैंने किया तेरे नाम,

मेरे राम, मेरे राम,

जीवन में सुख दुख , सबके हैं आते ,

कभी ये हंसाते , कभी ये रुलाते ,

मेरे जीवन का सुख तो , बस तेरा ही नाम,

सांसों में मेरी तो , तुम ही बसे हो राम ,

ये जीवन मेरा तो , मैंने किया तेरे नाम,

मेरे राम, मेरे राम,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।