जान से भी प्यारा राम

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तूँ तो मुझे जान से भी प्यारा है

तूँ तो मुझे जान से भी प्यारा... राम ।

तूँ तो मेरा प्राण अधारा... राम ।

नाम तेरा जग से है न्यारा... राम ।

तेरे बिना कोई न सहारा... राम ।

तेरा तो है एक ही इशारा... राम ।

बिगड़ा बना दे काम सारा... राम ।

तूँ तो मुझे जान से भी प्यारा... राम ।

तूँ तो मेरा प्राण अधारा... राम ।

तूँ तो मुझे जान से भी प्या...रा...

( राम राम सिया राम

राम राम सिया राम

राम राम सिया राम

राम राम सिया राम )

तेरी कृपा से तुझको पाया... राम ।

सांसों में तुझको ही बसाया... राम ।

कैसा ये जाल है विछाया... राम ।

जिधर देखूं तेरी ही काया... राम ।

तेरी रची है सारी माया... राम ।

कण कण में तूँही है समाया... रा...म ।

तेरी कृपा से तुझको पाया... राम ।

सांसों में तुझको है बसाया... राम ।

तेरी कृपा से तुझको पा...या...

( राम राम सिया राम

राम राम सिया राम

राम राम सिया राम

राम राम सिया राम )

तुझ से सीखी है मर्यादा... राम ।

मेरा तुझसे है पक्का वादा... राम ।

कम मिले याँ मुझको ज्यादा... राम ।

हक का खाऊँ पूरा याँ आधा... राम ।

जब भी आएगी कोई बाधा... राम ।

पक्का रखूँगा मैं इरादा... रा...म ।

तुझ से सीखी है मर्यादा... राम ।

मेरा तुझसे है पक्का वादा... राम ।

तुझ से सीखी है मर्या...दा...

( राम राम सिया राम

राम राम सिया राम

राम राम सिया राम

राम राम सिया राम )

तेरे भजनों को मैं तो गाऊँ... राम ।

तेरे मंदिर में चल के आऊँ... राम ।

तेरी मैं ज्योत जगाऊँ... राम ।

सीता मैया को फिर मैं ध्याऊँ... राम ।

लक्ष्मण हनुंमान को मनाऊँ... राम ।

तेरा निशान झुलाऊँ... रा...म ।

तेरे भजनों को मैं तो गाऊँ... राम ।

तेरे मंदिर में चल के आऊँ... राम ।

तेरे भजनों को मैं तो गा...ऊँ...

( राम राम सिया राम

राम राम सिया राम

राम राम सिया राम

राम राम सिया राम )

रोशन हो जाए निक्कू तेरा...

( राम राम सिया राम )

तेरे चरणों में हो जाए डेरा...

( राम राम सिया राम )

आए ऐसा नया सवेरा...

( राम राम सिया राम )

जीवन से मिट जाए अँधेरा...

( राम राम सिया राम )

अब तक करता था मेरा मेरा...

( राम राम सिया राम )

अब से जो कुछ है सब है तेरा...

( राम राम सिया राम )

रोशन हो जाए निक्कू तेरा... राम ।

तेरे चरणों में हो जाए डेरा... राम ।

रोशन हो जाए निक्कू ते...रा... ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।