जय जय भोला भंडारी

राम श्रीवादी अनुरोध
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय जय भोला भंडारी जय जय भोला भंडारी।

तेरा रूप निराला दुनियाँ जाये है वारी।

शीशजटा में गंग बिराजे भाले चंद्र सुशोभित है।

त्रिनेत्र कानों में कुण्डल देखके दुनियाँ मोहित है।

जिनकी गौरी है नारी करते बैल सवारी।।

त्रिपुण्ड लगा है ललाट सजा है गले में नाग काला है।

मंद मंद मुस्काये भोला ऐसा रूप निराला है।

पीछे भूतों की लारी दर्शन पाये नर नारी।।

तन पे विभूति रमाये भोला और ओढ़े मृगछाला है।

सिंगी नाद कर डमरू बजाये और गले में हाला है।

अनुरोध त्रिपुरारी दर्शन देओ अविकारी।।

रचना -राम श्रीवादी अनुरोध

आष्टा मध्यप्रदेश

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।