बोलो भोलेनाथ थारो कुण सो धन लागे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( तर्ज - बाँस की बाँसुरिया पे घणो इतरावे )

बोलो भोलेनाथ थारो कुण सो धन लागे

मान्ने उज्जैन बुला ले तेरी नगरिया घूमा ले

मेरे प्यारे बाबा भोले बाबा...

दरबार लगा के बाबा घनो मुसकावे

जो कोई ना आए की पर हुकुम चलाएं

मन्ने दास रख ले - 2

बोलो भोलेनाथ थारो कुण सो धन लागे....

नंदी पर बैठ बाबा घनो मुसकावे

यों तो चाले छम छम यों तो नाचे छम छम

जरा इसे रोक ले - 2

बोलो भोलेनाथ थारो कुण सो धन लागे....

भक्तों ने देखा बाबा घनो मुसकावे

लकी रोज दर आव तन भजन सुनाव

थोड़ी दया कर दे - 2

बोलो भोलेनाथ थारो कुण सो धन लागे....

Lyrics - lucky Shukla

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।