हाथों में त्रिशूल धारी मेरे भोले भंडारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हाथों में त्रिशूल धारी, मेरे भोले भंडारी,

भोले भंडारी मेरे, भोले भंडारी ।

नाम पड़ा त्रिपुरारी, मेरे भोले भंडारी ।

भोले जी मेरे साठ बरस के,

गौरां है कन्या कुँवारी, मेरे भोले भंडारी...

भोले जी खाए भांग धतूरा,

भांग पीस गौरां हारी, मेरे भोले भंडारी...

भोले जी करते हैं नंदी की सवारी,

गौरां करे सिंह सवारी, मेरे भोले भंडारी...

भोले है स्वामी सारे जगत के,

गौरां के स्वामी त्रिपुरारी, मेरे भोले भंडारी...

रावण को दे दी सोने की लंका,

देखकर भक्ति न्यारी, मेरे भोले भंडारी...

ऐसे दयालु मेरे औघड़ दानी,

कहती है दुनियाँ सारी, मेरे भोले भंडारी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।