जिस रंग में राखे साईंया

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॥ पावन पाठ ॥

जिस रंग में राखे साईंया उसी रंग में रहना,

सुख में इसको भूल न जाना,

दुःख आये तो ना गभराना,

सुख दुःख सहते रहना उसी रंग में रहना,

जिस रंग में राखे साईंया ......

डूब रही हो तेरी नैंयाँ आये ना आये बनके खवैया,

मत भर लेना नैना उसी रंग में रहना,

जिस रंग में राखे साईंया ....

लेखा जोखा सबका रखता एक दिवस सबको है परख ता,

याद हमेशा रखना उसी रंग में रहना,

जिस रंग में राखे साईंया ....

वो चाहे तो भीख मंगाए,

वो चाहे तो तकत बिठाये,

मुख से कुछ न कहना उसी रंग में रहना.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।