सतगुरु तेरे चरणों में प्रनाम हमारा है

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज़ः होंठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर करदो

सतगुरु तेरे चरणों में,

प्रनाम हमारा है।

कृपा अपनी बनाए रखना,

हमें तेरा सहारा है।।

तुम्हीं जगत गुरु स्वामी,

तुम्हीं देवगुरु भगवन।

तम्हीं सतचित आनंदघन,

शिव विष्णु चतुरानन ।।

गुरु के इन्हीं चरणन को,

राम कृष्ण पखारा है-सतगुरु...

हम दीनों दुःखियों को,

तूने अपनाया है।

हम भूले भटकों को,

तूने राह दिखाया है।।

ज्ञान भक्ति से सतगुरु,

भर दिया भण्डारा है - सतगुरु...

दया दृष्टि सदा रखना,

चरणों से लगा रखना।

अवगुण हमरे सतगुरु,

चित में न कभी धरना ।।

तेरा नाम हे 'मधुप' हरि,

जीवनधन हमारा है - सतगुरु...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।