कृपा की छांव रखना

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॥ पावन पाठ ॥

प्रभु आप अपनी कृपा की छांव रखना,

पल भर भी ना बिसारूं बस इतना ध्यान रखना।।

मझधार है भंवर है जीवन का ऐ सफर है,

कभी डगमगाए नैया तो पतवार बन के रहना।।

अज्ञान है जीवन में छाया घना अंधेरा,

मैं हूं तेरे सहारे सब कुछ तूं ही है मेरा।।

तेरा ही आसरा है बस मुझको मेरे भगवन,

हर पल प्रभु मुझे बस अपनी शरण में रखना।

अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।