आधी रात में खनक गयो बैरी कंगना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इन प्यासे पपीहे से लोचन को,, निज दर्शन स्वाति पिला जा जरा ।

यह माया मरीच का दूर हटा,, दृग प्रेम का पाठ पढ़ा जा जरा ।।

नव नीरद भेष लिए मुरली,,इन नैनों के बीच समा जा जरा ।

अरे निष्ठुर मोहन आजा जरा,, वह रूप अनूप दिखा जा जरा ।।

अजहू ना आए, हमारे मोहना,,,

आधी रात में खनक गयो बैरी कंगना,

रात बिताऊँ गिन,गिन तारे,

ऐसे निठुर भए श्याम हमारे,

श्याम बिना, मेरो सूनो अंगना,

आधी रात में खनक गयो...

श्याम बिरह में, तड़पी जाऊं

बिजली चमके, डर,डर जाऊं

संग की सहेली, कोई भी संग ना,,,

आधी रात में खनक गयो...

जब से गए मोरी सुध हू ना लीनी

ना जाने सौतन कर लीनी

वर्षों गुजरे, आ जाओ अब ना,,,,

आधी रात में खनक गयो....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।