जटाधारी बनके त्रिपुरारी बन के चले आना भोले जी चले आना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जटाधारी बनके त्रिपुरारी बन के चले आना भोले जी चले आना

तुम ओघड रूप में आना

भूत साथ लेके

मुंड हाथ लेके चले आना.

जटाधारी बनके त्रिपुरारी बन के चले आना भोले जी चले आना

तुम भंगिया रूप में आना

जोला हाथ लेके

भंग साथ लेके चले आना

जटाधारी बनके त्रिपुरारी बन के चले आना भोले जी चले आना

तुम जोगिया रूप में आना

डमरू हाथ लेके नंदी साथ लेके चले आना

जटाधारी बनके त्रिपुरारी बन के चले आना भोले जी चले आना

तुम मोहिनी रूप में आना

गंगा साथ लेके चंदा माथे लेके चले आना

जटाधारी बनके त्रिपुरारी बन के चले आना भोले जी चले आना

तुम भोले रूप में आना

गोरा साथ लेके त्रिशूल हाथ लेके चले आना

जटाधारी बनके त्रिपुरारी बन के चले आना भोले जी चले आना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।