साधो ये मुर्दो का गांव

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॥ पावन पाठ ॥

जेही मरने से जग डरे,मेरे मन आंनद

कब मरिहो कब पाईयो,पुरंण परमान्द

मरते मरते जग मुया,मुये ना जाना कोए

ऐसे होय के ना मुया,बहुर ना मरना होये

साधो ये मुर्दों का गांव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।