॥ पावन पाठ ॥
जेही मरने से जग डरे,मेरे मन आंनद
कब मरिहो कब पाईयो,पुरंण परमान्द
मरते मरते जग मुया,मुये ना जाना कोए
ऐसे होय के ना मुया,बहुर ना मरना होये
साधो ये मुर्दों का गांव
जेही मरने से जग डरे,मेरे मन आंनद
कब मरिहो कब पाईयो,पुरंण परमान्द
मरते मरते जग मुया,मुये ना जाना कोए
ऐसे होय के ना मुया,बहुर ना मरना होये
साधो ये मुर्दों का गांव