हुण आपा खोना बाकी हैं

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मैं सब दा हो के वेख लया

एक तेरा होना बाकी ऐ

मैं अपना सब कुज खो बेठा

हुन आपा खोना बाकी ऐ

तेरी याद च रो रो ऐ प्रीतम

सब पानी मूक गया अखियाँ दा

हुन खून जिगर दा अखियाँ राह

रो रो के चोना बाकी ऐ

मैं सब दा हो के वेख लया

एक तेरा होना बाकी ऐ

मैं अपना सब कुज खो बेठा

हुन आपा खोना बाकी ऐ

मेरी उम्र चली गई आज तीकर

लोकां दे रोने रोंदे दी

लोकां दे रोने रो बेठी

हुन अपना रोना बाकी ऐ

मैं सब दा हो के वेख लया

एक तेरा होना बाकी ऐ

मैं अपना सब कुज खो बेठा

हुन आपा खोना बाकी ऐ

श्रद्धा दा धागा वट लया,

सधरा दियां कलियाँ चुन लईयां

तेरे सोने गल विच पाऊंन लई

बस हार परोना बाकी ऐ

मैं सब दा हो के वेख लया

एक तेरा होना बाकी ऐ

मैं अपना सब कुज खो बेठा

हुन आपा खोना बाकी ऐ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।