सांवरिया जी जाणो है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तीस लगी रे म्हारा मन में सेठ की मिलणे उनसे जाणो हे,

मंडफिया में बैठयो साँवरो, दर्शन उनको पाणो है

म्हारे सांवरिया जी जाणो है

ओ बाट देख रह्यो थो कब से, सांवरिया ने बुलायो है,

भेजो नहीं बुलाओ, जैसे खुद ही लेणे आयो है।

कट नहीं रह्यो टेम, अब ना होतों इंतजार रे,

बड़ी प्यारी है सूरत उकी, भाई जल्दी चला कार रे।

तू जो बुलावे, दौड़यो आऊँ,

खुद को मैं तो रोक नी पाऊँ।

माँ बनावे चूरमो म्हारी,

हाथा से में थारे जिमाऊँ।

बड़ी प्यारी है सूरत या,

नजर म्हारी कैसे हटाऊँ।

म्हारा मन में आवे रोज यो ख्याल सांवरा,

बैठूँ थारा पास , सुनाऊँ हाल सांवरा

घर म्हारो तो बहुत दूर है,

देखणो थारे भी जरूर है।

रोज़ तो नी अई पाऊँ सांवरा,

कैसे थारे मनाऊँ सांवरा?

मन में तो आवे के

घर थारे ले जाऊँ सांवरा।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।