दिलकश तेरा नक्शा है सूरत तेरी प्यारी है

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॥ पावन पाठ ॥

दिलकश तेरा नक्शा है, सूरत तेरी प्यारी है

जिसने भी तुझे देखा, वो जान पे वारी है

क्या पेश करूं तुमको, क्या चीज़ हमारी है

ये दिल भी तुम्हारा है और जान तुम्हारी है

ये दिल एक मंदिर है, और मन ये पुजारी है

इस दिल के मंदिर में, तस्वीर तुम्हारी है||1||

दिलकश तेरा नक्शा है,,,,,,,,,

हम लाख बुरे ही सही, कहलाते तो तेरे हैं

चरणों से लगा लेना, क्या शान तुम्हारी है

दिलकश तेरा नक्शा है,,,,,

ना करना जुदा दिल से, हसरत ये हमारी है

इस दिल में बसे रहना, किस्मत ये हमारी है

दिलकश तेरा नक्शा है,,,,,,,,

क्या पेश करूँ तुमको, क्या चीज हमारी है

ये दिल भी तुम्हारा है, ये जान तुम्हारी है

दिलकश तेरा नक्शा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।