श्याम नहीं आये घनश्याम नहीं आये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

बैठी....

1.तेरे दर्शन बिन,दुखी मैं सांवरिया

कब आओगे श्याम,मेरी नगरिया

कोई तो आके मेरी,ख़बर सुनाये

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

बैठी....

2.मन में बसी तेरी,सांवरी सुरतिया

कैसे कटेगी मोरी,सारी उमरिया

बाली उमरिया मेरी,अति घबराये

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये

बैठी रहूं यमुना पे, आस लगाये

बैठी....

3.तेरे दर्श बिन,दुखी मैं सांवरिया

कब आओगे श्याम,मोरी नगरिया

कोई तो आके,ख़बर सुनाये

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

बैठी....

4.काधें पे सोहे तेरी,कारी कमरिया

मन मेरा मोहे,तेरी प्यारी बांसुरिया

मैं तो शरणं प्रभु,तेरा गुण गाऊं

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।