मेरे पाप तू मिटा दे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे पाप तू मिटा दे जग को चलाने वाले 2

मेरे सांसों की ये डोरी प्रभू ष्याम के हवाले

मेरे‌पाप तू मिटा दे

तेरे सिवा न कोई मेरा जग में आसरा है 2

मुझको तलाश तेरी अंखियों में सांवरा है

मिलने की आरजू‌ है 2मुरली बजाने वाले

मेरे पाप तू मिटा दे

दुनिया है मेरी मीरा भंवर में फंसती है नैया 2

आ जाओ बन के भांजीं कर दो पार मेरी नैया

हर सवांस मे बसे हो दिल में समाने वाले

मेरे‌पाप तू मिटा दे

जन्नत में भेज चाहे दो‌ जखमे भेज दें तू 2

हम भी तेरे दीवाने आ कर के देख ले तू

हमको नहीं है प्रवाह 2 गयूऐ चलाने वाले

मेरे पाप तू मिटा दे

हर शह में वास तेरा कहता है ये जमाना 2

अब मेरी बारी पे तुम करते हो‌ कंयू बहाना

मानूंगा मैं तो जब भी 2 मुझे चरनो से लगा ले

मेरे पाप तू मिटा दे जग को चलाने वाले

मेरे सांसों की ये डोरी प्रभू ष्याम के हवाले

मेरे पाप तू मिटा दे जग को चलाने वाले

श्री कृंशन गोबिंद हरे मूरारी से नाथ नारायण वासुदेवा 5

हे नाथ नारायण वासूदेव आ हे नाथ नारायण वासुदेवा

लेखक गायक रसिक पागल मामा

9991515880 पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।