जग कल्याण न होता,

पारंपरिक
हनुमान जी भजन विविध भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

यदि त्रेता में राम न होते, दवापर घनश्याम न होते,

यदि चारो धाम न होते तो जग कल्याण न होता,

यदि राम सिया का वन दमन न होता,

तो दशरथ जी का मरण न होता,

सीता चुराई न जाती लंका जाती न जलाई,

यदि रावण मरण न होता तो जग कल्याण न होता,

यदि अर्जुन के संग श्री कृष्ण न होते,

तो नर दुर्योधन हरे न होते,

राज नहीं जाता सरताज नहीं जाता,

यदि महाभारत न होता तो जग कल्याण न होता

यदि राम के संग में हनुमान न होते ,

तो लक्ष्मण जी बचे प्राण न होते,

कौन सांजवणी लता कौन बूटी पिलाता,

यदि लक्ष्मण जिंदा न होते तो जग कल्याण न होता

यदि भक्तो के संग भगवान ना होते,

तो सारी उम्र के अरमान ना होते,

अरमान नही होता समान नही होता,

यदि गुरु का ज्ञान न होता, तो जग कल्याण न होता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।