साईं तेरी शिर्डी को मेरा प्रणाम साईं की पावन की भूमि

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॥ पावन पाठ ॥

साईं की पावन की भूमि को मेरा प्रणाम

साईं तेरी शिर्डी को मेरा प्रणाम ,

शिर्डी ये तेरी साईं दिल में उतर गई,

मिटटी लगाई सर से किस्मत सवर गई,

झोली थी खली मेरी झोली ये भर गई,

सरकार साईं नाथ सुनलो मेरी पुकार,

ओ साईं तेरी शिर्डी को मेरा प्रणाम,

भक्तो का लगता मेला इस शिर्डी गाँव में,

साईं विराजे मेरे निबुआ की छाव में,

श्रद्धा सबुरी भरलो जीवन की नाव में,

सरकार साईं नाथ सुनलो मेरी पुकार,

साई तेरी शिर्डी को मेरा प्रणाम,

तेरा करम हुआ तो हम शिर्डी आएँगे,

पा करके तेरा दर्शन भाग्य खुल जाएंगे,

नाम लेने से तेरा भाव से तर जाएंगे,

सरकार साईं नाथ साईं नाथ साईं नाथ,

साईं तेरी शिर्डी को मेरा प्रणाम,

जब तक बिका ना था कुछ मोल ही न था,

तुमने खरीद कर अनमोल कर दिया,

साई तेरी शिर्डी को मेरा प्रणाम,

जय जय साईं राम राम,

बोलो जय जय साईं राम,

साईं की पावन की भूमि को मेरा प्रणाम,

साईं तेरी शिर्डी को मेरा प्रणाम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।