रघुनंदन आज मोरे अंगना

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

रघुनंदन आज मोरे अंगना

रघुनंदन आज मोरे अंगना

तोरी बांट निहारू चले आओ

संग में लाओ सीता मैया

संग में लाओ लक्ष्मण भैया

हनुमान जति को ले आना

रघुनंदन आज मोरे हे वंदना

युग बीते कई वर्ष भी बीते

आंखें तुमको ढूंढ रही

कब आओगे मोरे अंगना

तेरी जुगनिया पूछ रही

कब आगे मोरे अंगना

तेरी जुगनिया पूछ

रही दिन बीत गए रेना

बीती दिन बीत गए लेना

बीती तोरी बांट निहार

चले आओ रघुनंदन

आज मेरे अंगना

लगन लगी है राम

तुम्हारी चरणन के दर्शन पाऊं

लगन लगी है राम

तुम्हारी चरणन के दर्शन पाऊं

राम नाम से बड़ा ना कोई

राम नाम अमृत

पाऊ क्यों क्यों भूल गए प्रभु

आन बसो क्यों भूल गए प्रभु

आन बसो पूरी बांट निहारू

चले आओ रघुनंदन आज मोरे अंगना

तुम करुणा के सागर प्रभु जी

करुणा करके आ जाओ

तुम करुणा के सार प्रभु जी

करुणा करके आ जाओ

इस कलयुग में घोर अंधेरा

नवधा भक्ति बता जाओ

छोटू नैया मजधार पड़ी

छोटू नैया मजधार पड़ी

इसे आकर पार लगा जाओ

रघुनंदन आज मोरे अंगना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।