मन में खोट भरी और मुख में हरी

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मन में खोट भरी और मुख में हरी,

फिर मंदिर में जाने से क्या फ़ायदा ।

मैल मन का धोया, बदन धो लिया,

फिर गंगा नहाने से क्या फ़ायदा ॥

मन में मूरत प्रभु की उतारी नहीं,

है सब से बड़ा तो भिखारी वोही ।

धन दौलत पे तू क्यूँ गुमान करे

जब संग ही ना जाए तो क्या फ़ायदा ॥

तू रोज़ रामायण है पढता मगर,

व्यर्थ है पढ़ के मन ना उतारी अगर ।

ना माने पिता माँ के कहना जो तू,

फिर रामायण पड़ने से क्या फ़ायदा ॥

उपदेश तो अच्छे तू देता फिरे,

और करता करम तू सदा ही बुरे ।

पहले खुद पे करो तुम अमल बाद में.

गयान दूजो को देने का है कायदा ॥

तीर्थों पे गया तू, मगर मन तेरा,

काम क्रोध ने डाला था जिस पे डेरा ।

मन का धाम जो सब से बड़ा ना किया,

चारो धाम पे जाने से क्या फ़ायदा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।