॥ पावन पाठ ॥
तुम्हें देखती हूं तो,लगता है ऐसे
के जैसे युगों से,तुम्हे जानती हूं
अगर तुम हो सागर.....
अगत तुम हो सागर,मैं प्यासी नदी हूं
अगर तुम हो सावन,मैं जलती कली हूं
के जैसे युगों से,तुम्हें जानती हूं
तुम्हें देखती....