चारो धामों से निराला बृज धाम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ब्रज चौरासी कोस की परिकम्मा एक देख

सो लख चोरासी जोनि की संकट हरि हर लेत

जय जय ब्रिज भूमि जय जय बृज भूमि,,,2

चारो धामों से निराला बृज धाम

के दर्शन कर लेयो जी

चारो धामों से निराला बृज धाम

के दर्शन कर लेयो जी

हो दर्शन करल्यो सिमरण करल्यो

वन्दन करल्यो जी

लैके राधा जी बिहारी जी को नाम

के दर्शन कर लेयो जी

चारो धामों से निराला बृज धाम

के दर्शन कर लेयो जी

ये है मथुरा नगरिया जय बोलो

हो यहाँ जन्मे सांवरिया जय बोलो

हो, आधी आधी रात जनम प्रभु लीन्यो

सुर, नर मुनि जन चित सुख दीन्यो

झोली डंडा पालकी, जय कन्हैया लाल की

झोली डंडा पालकी, जय कन्हैया लाल की

हो वचन दिया सो प्रभु पूरण कीन्यो

श्री विष्णु बने जी घनश्याम,

के दर्शन कर लेयो जी

चारो धामों से निराला बृज धाम

के दर्शन कर लेयो जी

कान्हा मथुरा से आयो,, गोकुल में

हो, माखन चोर कहायो,, गोकुल में

हो,,, माखन खायो याने माटी हू खायी

पकड्यो यशोदा ने तो दीन्ही सफाई

मैया मोरी,,, कसम तोरी,,, मैं नहीं माखन खायो ,2

हो,,, माखन खायो याने माटी हू खायी

पकड्यो यशोदा ने तो दीन्ही सफाई

मुख में दियो ब्रह्मांड दिखाई

ऐसे मोहन को सहास्त्र प्रणाम

के दर्शन कर लेयो जी

चारों धामों से निराला ब्रजधाम,

के दर्शन कर लेयो जी

बरसाने की राधा ,,,राधा राधा बोल

हे, जिसने मोहन को बांधा,,,राधा राधा बोल

हो, होली खेले तो आजा कृष्ण मुरारी

बरसाने में , बुलाबे राधा प्यारी

हो,, कान्हा बरसाने में आए जइयो, बुलाय रही राधा प्यारी

बुलाए रही राधा प्यारी,,,,,बुलाए रही राधा प्यारी

हो कान्हा बरसाने में आए जइयो बुलाए रही राधा प्यारी

हो,, दोनों एक दूजे के प्रेम पुजारी

दोनों मिलके भयो जी इक नाम

के दर्शन करल्यो जी

चारो धामों से निराला बृज धाम

के दर्शन कर लो जी

ब्रज बरखा ने घेरा,,,, श्याम श्याम श्याम

हो सबने श्यामा को टेरा,,,श्याम श्याम श्याम

प्रभु तुम बिन हमरी कौन खबर ले

गोवर्धन गिरधारी,,2

हो गोवर्धन उंगली पे उठायो

प्राणन से प्यारो ब्रिज डूबत बचायो

कंस मार ये भेद बतायो

जैसी करनी वैसो ही परिणाम

के दर्शन करल्यो जी

चारो धामों से निराला बृज धाम

के दर्शन कर लो जी

वृन्दावन सुहावन, क्या कहिये

भयो प्रेम अति पावन, क्या कहिये

हो बांके बिहारी कहु कुञ्ज बिहारी,,,2

स्वामी हरि दास हरि पे बलिहारी

आज हू रचावे यहाँ रास मोरारी

कुंजन की छटा अभिराम

के दर्शन करल्यो जी

चारो धामों से निराला बृज धाम

के दर्शन कर लो जी

हो दर्शन करल्यो सिमरण करल्यो

वन्दन करल्यो जी

चारो धामों से निराला बृज धाम

के दर्शन कर लो जी

जय जय ब्रिज भूमि जय जय बृज भूमि

जय जय ब्रिज भूमि जय जय बृज भूमि

सिंगर भरत कुमार दबथरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।