दुःखियों को तारने वाले

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॥ पावन पाठ ॥

दुःखियों को तारने वाले,

ऐसे मिल पाते हैं कहाँ ?

कैसे गाऊँ उनकी गाथा,

जो प्राणी है इतने महाँ ।।

जो बिछुड़ते राह दिखाता,

जो दुःखियों के कष्ट मिटाता ।

जो दुखियों का बने सहारा,

वो सबका होता है प्यारा ।।

ऐसे दीनों के रखवाले,

ऐसे मिल पाते हैं कहाँ ?

दुःखियों को....

जो किसी का अहित न करता,

सबसे ही जो प्रेम है करता,

जो मिले खुशी से सबसे,

जिसने प्रेम किया है जग से ।।

प्रेमी-निर्मल हिरदय वाले,

ऐसे मिल पाते हैं कहाँ ?

दुःखियों को....

सेवा का जो मर्म समझता,

दुःख हरना धर्म समझता ।

प्रभु को देखे सबके अन्दर,

जिसमें भक्ति का है समन्दर ।।

कान्त प्रभु को पाने वाले,

ऐसे मिल पाते हैं कहाँ ?

दुःखियों को....

भजन रचना एवं सुमधुर स्वर :-

दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।