सांवरा थारी माया को पायो कोनी पार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सांवरा थारी माया को पायो कोनी पार रे,

सांवरिया थारी माया को पायो कोनी पार रे,

भेद नहीं जाणो रे दयालु दीनानाथ, महीना महीना लार निकले नोट करोड़ा माय ।

थाके वो नोटा ने सांवरा कई करोला आप,

थाके वो नोटा ने सांवरिया कई करोला आप,

भोला भाला सब भक्ता रा भररिया हो भंडार,

थारा वो सगला भक्ता री रखरिया सांवरा लाज ।

दिन उगता ही लेवूं रे म्हारा सांवरिया रो नाम,

दिन उगता ही लेवूं रे म्हारा सेठ सांवरिया रो नाम,

धंधों पाणी रुजक रोटी देवा वालो सरकार,

धंधों पाणी रुजक रोटी देवे है सरकार ।

थारी चौखट पे जो भी आवे किरपा बरसावे अपार,

थारी चौखट पे जो कोई आवे किरपा बरसावे अपार,

मंडफिया माई एक ठिकानों सांवरिया सरकार,

मंडफिया माई बणी हवेली सांवरिया सरकार ।

करोड़ा रुपया ने कठे रखेला मैं लेवूला संभाल,

करोड़ा रुपया ने कठे मेलेला मैं लेवूला संभाल,

म्हारी रे तिजोरी खाली पड़ी मैं भिखारी आयो द्वार,

म्हारी रे तिजोरी खाली पड़ी मैं भिखारी आयो द्वार ।

उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम सब आवे नर नार,

चार खुट रा आवे जातरी बोले जय जयकार,

गोकुल शर्मा गावे रे लिख दे सांवरियो सरकार,

गोकुल भजना गावे रे लिख दे सांवरियो सरकार ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।